Ganesh katha

एक बार विनायकजी बालकरूपमें चम्मचभर दूध और चुटकीभर चावल लिये हुए नगरकी गलियोंमें घूम रहे थे और पुकार-पुकारकर कह रहे थे- ‘कोई मेरे लिये खीर बना दे, कोई मेरे लिये खीर बना दे’; परंतु इतने थोड़े-से दूध तथा चावलसे खीर किस प्रकार बन सकती है? अतः कोई भी व्यक्ति उस बालकका काम कर देनेके लिये तैयार नहीं हुआ। अन्तमें बालक विनायक एक बुढ़ियाके घरके सामने पहुँचा तो उसने स्नेहवश उसकी बात स्वीकार कर ली और बर्तनमें उसका दूध-चावल भरकर उसे आगपर चढ़ा दिया।

बालक स्नान करनेके लिये बाहर चला गया और इधर बुढ़ियाका बड़ा बर्तन खीरसे भर गया। अब तो बुढ़ियासे खीर खाये बिना नहीं रहा गया। पहले उसने एक थाली भरकर बालकके लिये अलग रख दी और फिर अपने लिये थाली खीरसे भर ली तथा आरामसे उसे खा लिया। इसके बाद बालक स्नान करके आया और उसने खीर माँगी तो बुढ़ियाने उसके सामने खीरकी थाली रख दी। परंतु बालकने उस खीरको देखते ही कहा कि ‘यह तो जूठी है’। इसपर बुढ़ियाने सारी बात प्रकट कर दी। बालक विनायक बुढ़ियाके सत्य वचनपर परम प्रसन्न हुए और उसे सब प्रकारसे सुखी बना दिया।Published on Famous Motivational Tales To read more visit us .

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