Author name: PKH

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आभूषणों का क्या प्रयोजन

हस्तस्य भूषणं दानं सत्यं कण्ठस्य भूषणम् । कर्णस्य भूषणं शास्त्रं भूषणै: किं प्रयोजनम् ॥ हाथ का आभूषण दान करना है,

Value of time

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आयुष: क्षणमेकोऽपि, न लभ्य: स्वर्णकोटिकै: ।  स चेन्निरर्थकं नीत:, का नु हानिस्ततोऽधिका: ॥ आयु का एक क्षण भी करोडों स्वर्ण

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शब्दों के दास न बनें

एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला नौजवान चोर है l यह बात दूर –

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सुभाषित

वाणी रसवती  यस्य यस्य श्रमवती क्रिया । लक्ष्मीर्दानवती यस्य सफलं तस्य जीवितम् ॥ भावार्थ- जिसकी वाणी रसपूर्ण हो, कर्म-क्रिया श्रमवान

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